Table Of Contents Introduction: On Thursday, Prime Minister Narendra Modi delivered the much-awaited address to the joint session of the US Congress. However, the event was not without controversy, as more than 70 members of Congress protested ahead of the address, raising concerns about democratic decline in India. Reflecting their concerns, a handful of members also decided to boycott the event. The development underlines the growing international scrutiny on India's democratic landscape and raises important questions about the state of democracy in the world's largest democratic nation. Growing Concerns About Democratic Backsliding: The concerns expressed by members of the US Congress revolve around the perceived democratic decline in India. While India has long been proud of its democratic traditions, critics argue that recent policies and actions have cast doubt on the government's commitment to democratic principles. Issues of ...
Table Of Contents परिचय: भारतीय संविधान , जिसे अक्सर दुनिया में सबसे प्रगतिशील और व्यापक में से एक माना जाता है , इसके अस्तित्व का श्रेय डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर के अथक प्रयासों और दूरदर्शी नेतृत्व को जाता है। भारतीय संविधान के वास्तुकार के रूप में लोकप्रिय डॉ. अम्बेडकर ने नव स्वतंत्र भारत की नियति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सामाजिक न्याय , समानता और व्यक्तिगत अधिकारों के लिए उनकी अथक वकालत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है। यह लेख भारतीय संविधान और डॉ. बी.आर. की आपस में जुड़ी कहानियों पर प्रकाश डालता है। अम्बेडकर ने देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर उनके गहरे प्रभाव पर प्रकाश डाला। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर: सामाजिक न्याय के चैंपियन: 14 अप्रैल , 1891 को मध्य प्रदेश के महू शहर में एक अछूत परिवार में जन्मे डॉ. अंबेडकर को कम उम्र से ही भारी सामाजिक भेदभाव और असमानता का सामना करना पड़ा। हालाँकि , उनकी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प ने उन्हें आगे बढ़ाया और वह भारत के सबसे प्रतिष्ठित विद्वानों , न्यायविदों और समाज सुधारकों मे...